
🔱 9 Mukhi Rudraksha – Price ₹ 51,000/- Only
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🔱 9 मुखी रुद्राक्ष | कीमत: ₹51,000/-
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नवमुखी रुद्राक्ष (9 Mukhi Rudraksha)
नवमुखी रुद्राक्ष को भगवान शिव के अश्रुओं से उत्पन्न दिव्य रुद्राक्षों में अत्यंत शक्तिशाली माना गया है। शिवपुराण (विद्येश्वर संहिता), रुद्राक्ष जाबालोपनिषद्, पद्मपुराण, लिङ्गपुराण तथा स्कन्दपुराण में रुद्राक्ष की महिमा का वर्णन मिलता है। यद्यपि प्रत्येक मुखी रुद्राक्ष का विस्तृत विवरण सभी ग्रंथों में समान रूप से नहीं मिलता, परंतु परंपरागत शैव एवं तांत्रिक ग्रंथों में नवमुखी रुद्राक्ष को नवदुर्गा तथा देवी शक्ति का स्वरूप माना गया है। कुछ परंपराएँ इसे भगवान भैरव तथा यम धर्मराज से भी संबद्ध मानती हैं।
उत्पत्ति की कथा
शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव ने सहस्रों वर्षों तक लोककल्याण के लिए तप किया। जब उन्होंने नेत्र खोले, तो उनके करुणामय अश्रु पृथ्वी पर गिरे और उनसे रुद्राक्ष वृक्ष उत्पन्न हुए। उन वृक्षों पर विभिन्न मुखों वाले रुद्राक्ष प्रकट हुए, जिनमें प्रत्येक का अपना आध्यात्मिक महत्व बताया गया है।
नवमुखी रुद्राक्ष को माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों (नवदुर्गा) की दिव्य शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस कारण यह शक्ति, साहस, निर्भयता और रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
नवमुखी रुद्राक्ष के अधिष्ठाता देव
- माँ शैलपुत्री
- माँ ब्रह्मचारिणी
- माँ चन्द्रघण्टा
- माँ कूष्माण्डा
- माँ स्कन्दमाता
- माँ कात्यायनी
- माँ कालरात्रि
- माँ महागौरी
- माँ सिद्धिदात्री
कुछ शैव परंपराओं में इसे कालभैरव की कृपा का भी प्रतीक माना जाता है।
शास्त्रों के अनुसार लाभ
नियमपूर्वक धारण करने और साधना के साथ प्रयोग करने पर परंपरा में निम्न लाभ बताए गए हैं—
- भय, असुरक्षा और नकारात्मकता से रक्षा।
- आत्मविश्वास एवं साहस में वृद्धि।
- देवी कृपा एवं आध्यात्मिक उन्नति।
- तांत्रिक बाधाओं से संरक्षण (परंपरागत मान्यता)।
- मानसिक स्थिरता और एकाग्रता।
- कठिन परिस्थितियों में निर्णय क्षमता का विकास।
- आध्यात्मिक साधना में प्रगति।
- नवदुर्गा की कृपा प्राप्त होने की मान्यता।
किस ग्रह से संबंधित है?
ज्योतिषीय परंपरा के अनुसार नवमुखी रुद्राक्ष का संबंध केतु ग्रह से माना जाता है।
इसे धारण करने से परंपरागत मान्यता के अनुसार—
- केतु महादशा
- केतु अंतरदशा
- जन्मकुंडली में अशुभ केतु
- कालसर्प योग से संबंधित मानसिक भय (यदि विद्वान ज्योतिषी उचित समझे)
- आध्यात्मिक भ्रम एवं मानसिक अस्थिरता
में सहायता मिल सकती है।
किन राशियों के लिए उपयुक्त?
नवमुखी रुद्राक्ष किसी एक राशि तक सीमित नहीं है। इसे आवश्यकता और योग्य परामर्श के अनुसार कोई भी धारण कर सकता है। विशेष रूप से परंपरागत रूप से निम्न राशियों के लिए इसे लाभकारी माना जाता है—
- वृश्चिक
- धनु
- मीन
यदि कुंडली में केतु अशुभ हो, तो अन्य राशियों के जातक भी योग्य ज्योतिषीय सलाह के बाद इसे धारण कर सकते हैं।
किन नक्षत्रों में लाभकारी?
विशेष रूप से केतु के नक्षत्र—
- अश्विनी
- मघा
- मूल
के जातकों के लिए इसे शुभ माना जाता है, विशेषकर जब कुंडली में इसकी आवश्यकता हो।
धारण करने की विधि
श्रेष्ठ दिन:
- सोमवार
- शुक्रवार
- नवरात्रि
- महाशिवरात्रि
- किसी शुभ मुहूर्त में
विधि:
- प्रातः स्नान करें।
- रुद्राक्ष को गंगाजल एवं कच्चे दूध से शुद्ध करें।
- भगवान शिव एवं माँ दुर्गा की पूजा करें।
- धूप, दीप, पुष्प अर्पित करें।
- निम्न मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें—
ॐ ह्रीं हुं नमः।
या
ॐ दुं दुर्गायै नमः।
या
ॐ नमः शिवाय।
इसके बाद लाल या काले धागे अथवा चाँदी/सोने में धारण करें।
धारण करने के नियम
- सदैव स्वच्छता रखें।
- रुद्राक्ष का सम्मान करें।
- धारण करते समय सात्त्विक जीवनशैली अपनाना उत्तम माना गया है।
- समय-समय पर शिव मंत्र से अभिमंत्रित करें।
- किसी अन्य व्यक्ति को अपनी रुद्राक्ष माला पहनने के लिए न दें।
कौन धारण कर सकता है?
- शिव भक्त
- देवी उपासक
- तांत्रिक साधक (गुरु के मार्गदर्शन में)
- ध्यान एवं योग करने वाले साधक
- केतु संबंधी ज्योतिषीय दोष वाले व्यक्ति (योग्य ज्योतिषीय परामर्श के बाद)
क्या सभी लोग धारण कर सकते हैं?
हाँ, परंपरागत मान्यता के अनुसार अधिकांश लोग इसे धारण कर सकते हैं। फिर भी यदि किसी विशेष ग्रह दोष, महादशा या साधना के उद्देश्य से धारण किया जा रहा हो, तो योग्य ज्योतिषाचार्य या गुरु के मार्गदर्शन में धारण करना अधिक उचित माना जाता है।
निष्कर्ष
नवमुखी रुद्राक्ष शक्ति, साहस, निर्भयता और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। शैव एवं शक्त परंपराओं में इसे माँ नवदुर्गा की कृपा और केतु ग्रह के संतुलन से जोड़ा जाता है। यह भय, मानसिक अस्थिरता और आध्यात्मिक बाधाओं से रक्षा की पारंपरिक मान्यता रखता है। हालांकि, किसी भी रुद्राक्ष को धारण करने से पहले उसकी प्रामाणिकता, उचित शुद्धि, तथा व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार सलाह लेना सर्वोत्तम माना जाता है।
ॐ ह्रीं हुं नमः।
ॐ दुं दुर्गायै नमः।
ॐ नमः शिवाय।
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