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बिल्वाष्टकम् स्तोत्र (Bilvashtakam) सौरभ आचार्य गुरुजी

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बिल्वाष्टकम् स्तोत्र (Bilvashtakam) सौरभ आचार्य गुरुजी

 

 

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनॆत्रं च त्रियायुधं ।
त्रिजन्म पापसंहारम् ऎकबिल्वं शिवार्पणं ॥१॥
tridalaṃ triguṇākāraṃ trinĕtraṃ ca triyāyudhaṃ .
trijanma pāpasaṃhāram ĕkabilvaṃ śivārpaṇaṃ ..1..
त्रिशाखैः बिल्वपत्रैश्च ह्यच्छिद्रैः कोमलैः शुभैः ।
शिवपूजां करिष्यामि ह्येकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ २॥
triśākhaiḥ bilvapatraiśca hyacchidraiḥ komalaiḥ śubhaiḥ .
śivapūjāṃ kariṣyāmi hyekabilvaṃ śivārpaṇam .. 2..
अखण्ड बिल्वपत्रेण पूजिते नन्दिकेश्वरे ।
शुद्ध्यन्ति सर्वपापेभ्यो ह्येकबिल्वं शिवार्पणम् ॥३॥
akhaṇḍa bilvapatreṇa pūjite nandikeśvare .
śuddhyanti sarvapāpebhyo hyekabilvaṃ śivārpaṇam ..3..
शालिग्राम शिलामेकां विप्राणां जातु चार्पयेत् ।
सोमयज्ञ महापुण्यं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥४॥
śāligrāma śilāmekāṃ viprāṇāṃ jātu cārpayet .
somayajña mahāpuṇyaṃ ekabilvaṃ śivārpaṇam .. 4..
दन्तिकोटि सहस्राणी वाजपेय शतानि च ।
कोटिकन्या महादानं एकबिल्वं शिवार्पणम् ॥५॥
dantikoṭi sahasrāṇī vājapeya śatāni ca .
koṭikanyā mahādānaṃ ekabilvaṃ śivārpaṇam ..5..
लक्ष्म्यास्तनुत उत्पन्नं महादेवस्य च प्रियम् ।
बिल्ववृक्षं प्रयच्छामि ह्येकबिल्वं शिवार्पणम् ॥६॥
lakṣmyāstanuta utpannaṃ mahādevasya ca priyam .
bilvavṛkṣaṃ prayacchāmi hyekabilvaṃ śivārpaṇam ..6..
दर्शनं बिल्ववृक्षस्य स्पर्शनं पापनाशनम् ।
अघोरपापसंहारं एकबिल्वं शिवर्पणम् ॥ ७॥
darśanaṃ bilvavṛkṣasya sparśanaṃ pāpanāśanam .
aghorapāpasaṃhāraṃ ekabilvaṃ śivarpaṇam .. 7..
मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे ।
अग्रतः शिवरूपाय ह्येकबिल्वं शिवार्पणम् ॥ ८॥
mūlato brahmarūpāya madhyato viṣṇurūpiṇe .
agrataḥ śivarūpāya hyekabilvaṃ śivārpaṇam .. 8..
बिल्वाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ ।
सर्वपाप विनिर्मुक्तः शिवलोकमवाप्नुयात् ॥
bilvāṣṭakamidaṃ puṇyaṃ yaḥ paṭhet śivasannidhau .
sarvapāpa vinirmuktaḥ śivalokamavāpnuyāt ..

 

॥ बिल्वाष्टकम् अर्थ ॥

अर्थ: तीन दलवाला बिल्वपत्र, जो सत्त्व, रज और तम, प्रकृति के इन तीन गुणों का प्रतीक है, जो भगवान् शंकर के तीन नेत्र सूर्य, चन्द्र तथा अग्रि के स्वरुप है, जो शिवजी के शिव के तीन अस्त्र के स्वरुप है, तथा जो तीनों जन्मोके पापो को नष्ट करनेवाला है, ऐसे बिल्वपत्र को मैं भगवान्‌ शिव को समर्पित करता हूँ ॥ 1॥

अर्थ: तीन पत्तियों वाले छिद्ररहित, निर्मल तथा मंगल प्रदान करने वाले बिल्वपत्र से मैं भगवान् शिव की पूजा करूँगा। ऐसा एक बिल्वपत्र मैं भगवान् शिव को समर्पित करता हूँ ॥ 2॥

अर्थ: अखंडित अर्थात पूर्ण बिल्वपत्र से नन्दिकेश्वर भगवान् की पूजा करने पर मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर शुद्ध हो जाते हैं। ऐसा एक बिल्वपत्र मैं भगवान् शिव को समर्पित करता हूँ ॥ 3॥

अर्थ: मेरे द्वारा किया गया भगवान् शिव को यह बिल्वपत्र का समर्पण, ब्राह्मणों को शालिग्राम शिला के दान के समान तथा सोमयज्ञ के अनुष्ठान के समान महान् पुण्यशाली हो। अतः भगवान् शिव को मैं ऐसा बिल्वपत्र समर्पित करता हूँ ॥ 4॥

अर्थ: हजारों करोड़ हाथियों का दान, सैकड़ों वाजपेय-यज्ञ के अनुष्ठान तथा करोड़ों कन्याओं के महादान के समान फल प्रदान करने वाला एक बिल्वपत्र मैं भगवान् शिव को समर्पित करता हूँ ॥ 5॥

अर्थ: जो बिल्ववृक्ष विष्णु-प्रिया देवी लक्ष्मी के वक्षःस्थल से प्रादुर्भूत हुआ है और जो भगवान महादेव को अत्यंत प्रिय है, उस बिल्ववृक्ष तथा उसके एक पवित्र पत्र को मैं भगवान शिव को अर्पित करता हूँ ॥ 6॥

अर्थ: बिल्ववृक्ष का दर्शन और उसका स्पर्श समस्त पापों को नष्ट करने वाला है। घोर से घोर पापों का नाश करने वाला यह बिल्वपत्र मैं भगवान् शिव को समर्पित करता हूँ ॥ 7॥

अर्थ: जिस बिल्वपत्र की जड़ ब्रह्मा स्वरूप, मध्य भाग विष्णु स्वरूप, और अग्र (शीर्ष) भाग शिव स्वरूप है, उस पवित्र बिल्वपत्र को मैं श्रद्धा से भगवान शिव को अर्पित करता हूँ ॥ 8॥

अर्थ: जो भगवान् शिव के समीप इस पुण्य प्रदान करने वाले “बिल्वाष्टक” का पाठ करता है , वह समस्त पापों से मुक्त होकर अन्त में शिवलोक को प्राप्त करता है ॥ 9॥

शिव बिल्वाष्टकम् स्तोत्र पाठ के लाभ

शिव बिल्वाष्टकम् स्तोत्र का पाठ भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक प्रभावशाली और सुगम माध्यम है। इस स्तोत्र में बेलपत्र की धार्मिक विशेषता तथा इसके द्वारा भगवान् शिव की आराधना का महत्व बताया गया है।

घोर पापों से भी मिलती है मुक्ति

इस स्तोत्र के श्लोकों में भी बताया गया है कि बिल्वाष्टकम् स्तोत्र पाठ के साथ शिवजी को बिल्वपत्र अर्पित करने से जन्म-जन्मांतर के सभी ज्ञात-अज्ञात पाप नष्ट हो जाते हैं।

भगवान् शिव की विशेष कृपा की होती है प्राप्ति

यह स्तोत्र तथा बिल्वपत्र शिवजी को अत्यंत प्रिय है। अतः इस स्तोत्र के नियमित पाठ से भोलेनाथ की असीम अनुकंपा प्राप्त होती है, जो जीवन के हर संकट को हर लेती है।

मनोकामनाएँ होती हैं पूर्ण

इस स्तोत्र के नियमित और श्रद्धा पूर्ण पाठ से धन, स्वास्थ्य, संतान सुख, और रिश्तों में मधुरता जैसी सभी इच्छाएँ पूर्ण हो जाती हैं।

ग्रह दोष एवं नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा

इस स्तोत्र का भक्तिपूर्वक किया गया पाठ वास्तु दोष, बुरी नज़र, और भूत-प्रेत बाधा से रक्षा करता है। बिल्वाष्टकम् स्तोत्र का पाठ मन की नकारात्मकता को दूर कर मानसिक शांति प्रदान करता है।

शिवलोक की होती है प्राप्ति

हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार, इस स्तोत्र का पाठ करने वाला मनुष्य मृत्यु के बाद जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो शिवलोक को प्राप्त करता है।

बिल्वाष्टकम् स्तोत्र पाठ विधि

बिल्वाष्टकम् स्तोत्र भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पावन और प्रभावशाली स्तुति है, जिसमें आदि शंकराचार्य ने बिल्वपत्र की महिमा का वर्णन किया है। इसे पढ़ने से पूर्व कुछ सरल विधियों का ध्यान रखा जाये, तो इसका प्रभाव और अधिक शुभकारी हो सकता है।

बिल्वाष्टकम् स्तोत्र पाठ विधि

  • प्रातःकाल जागकर शौच-स्नानादि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इस स्तोत्र के पाठ के लिए किसी शांत और पवित्र स्थान जैसे कि मंदिर या घर के पूजा स्थान का चयन करें।
  • अपने समक्ष शिवलिंग, शिव-पार्वती की मूर्ति या चित्र को पूजा स्थान पर स्थापित करें।
  • तत्पश्चात शिवजी के समक्ष धूप तथा दीप प्रज्वलित करें।
  • अब सर्वप्रथम शांत मन से बैठकर हाथ में जल लेकर इस प्रकार संकल्प करें – “ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः! अद्य शुभ दिने… (तिथि, अपना नाम और स्थान बोलें) मम सर्व पापक्षयपूर्वक श्री महादेव प्रीत्यर्थं बिल्वाष्टकम् स्तोत्र पाठं करिष्ये।”
  • फिर श्रद्धा पूर्वक इस स्तोत्र के 8 श्लोकों का संस्कृत या हिंदी में धीरे-धीरे पाठ करें।
  • प्रत्येक श्लोक के अंत में एक साफ तथा अखंड बिल्वपत्र लेकर शिवलिंग पर चढ़ाएं।
  • पाठ के अंत में शिवलिंग पर जल अर्पित कर “ॐ जय शिव ओंकारा” या “कर्पूरगौरं” आरती गाएँ।
  • भगवान् शिव को समर्पित इस बिल्वाष्टकम् स्तोत्र का पाठ पूर्ण श्रद्धा और शुद्ध भावना से करना सबसे महत्वपूर्ण है।
  • प्रतिदिन या फिर प्रत्येक सोमवार, श्रावण मास, प्रत्येक शिवरात्रि तथा प्रदोष के दिन इस स्तोत्र का पाठ उत्तम माना गया है।

 

 

⚠️ चेतावनी ⚠️
बिना गुरु संरक्षण के कोई भी साधना नहीं करनी चाहिए।
अज्ञानता में की गई साधना मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक हानि पहुँचा सकती है।
सही मार्गदर्शन और अनुभवी गुरु के निर्देशन में ही साधना करना सुरक्षित और फलदायी होता है।

 

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हर हर महादेव 🔱

 

Reference: Bilvashtakam – In Sanskrit, English with meaning, explanation

बिल्वाष्टकम् स्तोत्र अर्थ सहित | Bilvashtakam In Hindi

 

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