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माँ बगलामुखी आठवीं महाविद्या सौरभ आचार्य गुरुजी

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माँ बगलामुखी आठवीं महाविद्या सौरभ आचार्य गुरुजी

 

 

दस महाविद्याओं में बगलामुखी माता (Baglamukhi Mata) आठवीं महाविद्या के रूप में जानी जाती हैं। एक तरह से माता सती के 10 रूपों में से बगलामुखी माता को आठवां रूप माना गया है। मातारानी का यह रूप शत्रुओं का नाश करने वाला व वाक् शक्ति प्रदान करने के रूप में जाना जाता है।

इन्हें शत्रु-विनाशिनीवाक्-सिद्धि प्रदान करने वाली और नकारात्मक शक्तियों को स्तंभित करने वाली देवी कहा जाता है। तंत्र, मंत्र और साधना के क्षेत्र में माँ बगलामुखी का स्थान अत्यंत विशेष है।

 

Baglamukhi Mata | बगलामुखी माता

माता सती के कुल 10 रूप हैं जिन्हें महाविद्या का दर्जा दिया गया है। सभी दस रूपों के विभिन्न गुण व शक्तियां हैं। इन सभी में मातारानी का यह आठवां रूप जिसे हम बगलामुखी देवी के नाम से जानते हैं, अत्यधिक प्रसिद्ध है। “बगला” शब्द का अर्थ है वाक् (वाणी) और “मुखी” का अर्थ है जिस पर अधिकार हो। यानी माँ बगलामुखी वह शक्ति हैं जो शत्रु की वाणी, बुद्धि और क्रिया—तीनों को स्तंभित कर देती हैं।
माँ का स्वरूप पीले वस्त्रों में, पीले आसन पर विराजमान और हाथ में शत्रु की जिह्वा पकड़े हुए दिखाया जाता है। पीला रंग ज्ञान, स्थिरता और विजय का प्रतीक है।  मुख्य तौर पर गुप्त नवरात्र के आठवें दिन मातारानी के इस रूप की पूजा की जाती है।

 

बगलामुखी माता की कहानी

एक बार सतयुग में महाविनाश उत्पन्न करने वाला ब्रह्मांडीय तूफान उत्पन्न हुआ, जिससे संपूर्ण विश्व नष्ट होने लगा इससे चारों ओर हाहाकार मच गया। संसार की रक्षा करना असंभव हो गया। यह तूफान सब कुछ नष्ट-भ्रष्ट करता हुआ आगे बढ़ता जा रहा था, जिसे देख कर भगवान विष्णु जी चिंतित हो गए।

इस समस्या का कोई हल न पा कर वह भगवान शिव को स्मरण करने लगे, तब भगवान शिव ने कहा: शक्ति रूप के अतिरिक्त अन्य कोई इस विनाश को रोक नहीं सकता अत: आप उनकी शरण में जाएं।

तब भगवान विष्णु ने हरिद्रा सरोवर के निकट पहुंच कर कठोर तप किया। भगवान विष्णु के तप से देवी शक्ति प्रकट हुईं। उनकी साधना से महात्रिपुरसुंदरी प्रसन्न हुईं। सौराष्ट्र क्षेत्र की हरिद्रा झील में जलक्रीड़ा करती महापीतांबरा स्वरूप देवी के हृदय से दिव्य तेज उत्पन्न हुआ। इस तेज से ब्रह्मांडीय तूफान थम गया।

मंगलयुक्त चतुर्दशी की अर्धरात्रि में देवी शक्ति का देवी बगलामुखी के रूप में प्रादुर्भाव हुआ था। त्रैलोक्य स्तम्भिनी महाविद्या भगवती बगलामुखी ने प्रसन्न होकर भगवान विष्णु जी को इच्छित वर दिया और तब सृष्टि का विनाश रुक सका। देवी बगलामुखी को वीर रति भी कहा जाता है क्योंकि देवी स्वयं ब्रह्मास्त्र रूपिणी हैं। इनके शिव को महारुद्र कहा जाता है। इसीलिए देवी सिद्ध विद्या हैं। तांत्रिक इन्हें स्तंभन की देवी मानते हैं। गृहस्थों के लिए देवी समस्त प्रकार के संशयों का शमन करने वाली हैं।

दसमहाविधाओ मे से आठवी महाविधा है देवी बगलामुखी। इनकी उपासना इनके भक्त शत्रु नाश, वाकसिद्ध और वाद विवाद मे विजय के लिए करते है। इनमे सारे ब्राह्मण की शक्ति का समावेश है, इनकी उपासना से भक्त के जीवन की हर बाधा दूर होती है और शत्रुओ का नाश के साथ साथ बुरी शक्तियों का भी नाश करती है। देवी को बगलामुखी, पीताम्बरा, बगला, वल्गामुखी, वगलामुखी, ब्रह्मास्त्र विद्या आदि नामों से भी जाना जाता है।

 

बगलामुखी का अर्थ

बगलामुखी शब्द दो शब्दों के मेल से बना है: बगला व मुखी। “बगला” शब्द का अर्थ है वाक् (वाणी) और “मुखी” का अर्थ है जिस पर अधिकार हो। यानी माँ बगलामुखी वह शक्ति हैं जो शत्रु की वाणी, बुद्धि और क्रिया—तीनों को स्तंभित कर देती हैं।

इसमें बगला शब्द संस्कृत के वल्गा का अपभ्रंश है जिसका अर्थ होता है लगाम लगाना। मुखी का अर्थ मुहं या चेहरे से है। इस प्रकार बगलामुखी का मतलब किसी चीज़ पर लगाम लगाने वाले मुहं से है। मातारानी के इस रूप को शत्रुओं या दुष्टों पर लगाम लगाने के लिए पूजा जाता है।

सीधे तौर पर कहें तो बगलामुखी माता एक ऐसा रूप है जो दुष्टों की जिव्हा को पकड़ कर उन पर लगाम लगाने का काम करती हैं। बगलामुखी माता की फोटो में भी उन्हें दुष्ट की जीभ पकड़े हुए ही दिखाया गया है।

 

बगलामुखी माता का रूप

मातारानी का रूप भीषण होने के साथ-साथ अपने भक्तों की रक्षा करने वाला भी है। अपने इस रूप में मातारानी स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान हैं। इस सिंहासन पर राक्षस का मृत शरीर पड़ा हुआ है जिसके ऊपर मातारानी बैठी हुई हैं।

माँ बगलामुखी के सिर पर मुकुट है और केश खुले हुए हैं। उनके तीन नेत्र व दो हाथ हैं। शरीर का रंग सुनहरा है जबकि उन्होंने पीले रंग के वस्त्र व आभूषण धारण किए हुए हैं। उन्होंने अपने एक हाथ में शत्रु को दंड देने के लिए एक बेलन के समान अस्त्र पकड़ा हुआ है जबकि दूसरे हाथ से राक्षस की जीभ पकड़ी हुई है।

वह राक्षस मातारानी के सामने उनके चरणों में बैठा हुआ है जिसने अपने एक हाथ में तलवार पकड़ी हुई है। मातारानी ने उसी राक्षस की जीभ पकड़ी हुई है व उसकी ओर देखती हुई उसे डराने का प्रयत्न कर रही है।

बगलामुखी माता का मंत्र

अब हम मां बगलामुखी मंत्र की जानकारी आपको देंगे। दरअसल माता बगलामुखी के एक नहीं बल्कि कई मंत्र हैं जिन्हें अलग-अलग उद्देश्यों की पूर्ति हेतु उपयोग में लिया जाता है। इनमें तीन मुख्य मंत्र हैं जिन्हें हम बगलामुखी साधना मंत्र, बगलामुखी शत्रु विनाशक मंत्र व बगलामुखी ध्यान मंत्र के नाम से जानते हैं।

  • बगलामुखी साधना मंत्र

ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै ह्लीं ॐ नमः॥

यदि आप बगलामुखी देवी की साधना करने को इच्छुक हैं तो आपको इस मंत्र का जाप करना चाहिए। बगलामुखी साधना मंत्र का जाप मुख्य तौर पर गुप्त नवरात्रि के आठवें दिन किया जाता है। इसके जाप से मनुष्य की वाक् शुद्धि होती है। यदि उसे बोलने में कोई समस्या है, जैसे कि तुतलाहट, झल्लाना, अटकना इत्यादि तो वह ठीक हो जाती है।

  • बगलामुखी शत्रु विनाशक मंत्र

ॐ बगलामुखी देव्यै ह्लीं ह्रीं क्लीं शत्रु नाशं कुरु॥

Baglmukhi Mata की आराधना मुख्य तौर पर अपने शत्रुओं का नाश करने के लिए ही की जाती है। ऐसे में यदि आप सच्चे मन के साथ बगलामुखी शत्रु विनाशक मंत्र का जाप करते हैं तो अवश्य ही आपके शत्रुओं का नाश हो जाता है। इसी के साथ ही आपके जीवन में जो भी संकट या विपत्ति है, वह भी दूर होती है।

 

  • बगलामुखी ध्यान मंत्र

ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलयं बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा॥

यह Maa Baglamukhi का ध्यान करने वाला मंत्र होता है। बगलामुखी ध्यान मंत्र के लगातार जाप से आपके अंदर बगलामुखी माता की शक्तियां आती है। इससे व्यक्ति तेजवान व शक्तिशाली बनता है।

 

बगलामुखी पूजा के फायदे

यदि आप बगलामुखी माता की पूजा करते हैं तो इससे आपको कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं। देवी बगलामुखी की पूजा करने से हमें अपने शत्रुओं का नाश करने में सहायता मिलती है। इसलिए भक्तों के द्वारा बगलामुखी माता की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है व उन्हें प्रसन्न किया जाता है। आइए एक-एक करके बगलामुखी पूजा के फायदे जान लेते हैं।

  • शत्रुओं से मुक्ति पाने के लिए बगलामुखी माता की पूजा की जाती है। इससे शत्रु का संपूर्ण नाश तक संभव है।
  • किसी भी तरह की विपत्ति या संकट को दूर करने के लिए भी माता बगलामुखी की आराधना की जाती है।
  • आगे का मार्ग दिखाने के लिए बगलामुखी देवी का ध्यान किया जाता है। इससे हम उन्नति कर पाते हैं।
  • माँ हमारी वाक् शुद्धि भी करती है अर्थात उच्चारण में गलतियाँ, हकलाना या तुतलाहट इत्यादि देवी बगलामुखी के आशीर्वाद से ठीक होते हैं।
  • केवल वाक् शुद्धि ही नहीं बल्कि मन की शुद्धि के लिए भी मां बगलामुखी का ध्यान किया जाता है।

यही कारण हैं कि भक्तों के द्वारा बगलामुखी माता को इतना अधिक महत्व दिया गया है। साथ ही जगह-जगह उनके मंदिर बनाए गए हैं ताकि माँ की कृपा हम पर यूँ ही बनी रहे।

 

Maa Baglamukhi से संबंधित अन्य जानकारी

  • बगलामुखी माता पीले वस्त्र धारण करती हैं व इनका वर्ण भी पीला है। इसलिए इनका एक नाम पीताम्बरी देवी भी है।
  • माता बगलामुखी का एक अन्य नाम स्तम्भन देवी भी है क्योंकि यह शत्रुओं व दुष्टों को अपंग बनाने में सहायक है।
  • देवी बगलामुखी से संबंधित रुद्रावतार बग्लेश्वर महादेव हैं।
  • बगलामुखी देवी के तीन शक्तिपीठ हैं जो हिमाचल के कांगड़ा, मध्यप्रदेश के दतिया व शाजापुर में स्थित हैं।
  • महाभारत के भीषण युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण व अर्जुन ने भी शत्रुओं पर विजय पाने के लिए मां बगलामुखी की पूजा की थी।

 

⚠️ चेतावनी ⚠️
बिना गुरु संरक्षण के कोई भी साधना नहीं करनी चाहिए।
अज्ञानता में की गई साधना मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक हानि पहुँचा सकती है।
सही मार्गदर्शन और अनुभवी गुरु के निर्देशन में ही साधना करना सुरक्षित और फलदायी होता है।

 

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